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अमेरिका में Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta के खिलाफ बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा मुकदमा चल रहा है। 29 अमेरिकी राज्यों ने Meta पर आरोप लगाया है कि उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए गए हैं, जिससे बच्चे और किशोर ज्यादा समय तक इनका इस्तेमाल करते रहें। मामले में कंपनी पर बच्चों की मानसिक सेहत और उनकी प्राइवेसी को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
यह सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अगर अदालत Meta के खिलाफ फैसला देती है, तो Instagram और Facebook के डिजाइन, बच्चों के लिए उपलब्ध फीचर्स और डेटा प्राइवेसी से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
Meta पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
अमेरिकी राज्यों का आरोप है कि Meta ने Instagram और Facebook में ऐसे फीचर्स विकसित किए, जो बच्चों और किशोरों को ज्यादा देर तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने में मदद करते हैं।
मामले में खास तौर पर infinite scroll, notifications और engagement बढ़ाने वाले फीचर्स पर सवाल उठाए गए हैं। राज्यों का कहना है कि इन फीचर्स का इस्तेमाल युवाओं की कमजोरियों को समझकर उन्हें प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के लिए किया गया।
बच्चों की मानसिक सेहत भी बड़ा मुद्दा
इस मुकदमे का सबसे बड़ा हिस्सा बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत से जुड़ा है।
अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि Meta को सोशल मीडिया के लंबे इस्तेमाल से युवाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की जानकारी थी, फिर भी कंपनी ने ऐसे फीचर्स को जारी रखा जो यूजर्स का स्क्रीन टाइम बढ़ाते हैं।
हालांकि Meta इन आरोपों से इनकार करता है। कंपनी का कहना है कि वह युवाओं की सुरक्षा के लिए कई उपाय कर रही है और सोशल मीडिया तथा किशोरों की मानसिक सेहत के बीच संबंध को लेकर दावों पर वैज्ञानिक सहमति उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी अभियोजन पक्ष बता रहा है।
बच्चों का डेटा भी सवालों के घेरे में
मामले में सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तिगत डेटा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
अमेरिकी कानून के तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों के ऑनलाइन डेटा को लेकर विशेष सुरक्षा नियम हैं। राज्यों का आरोप है कि Meta के प्लेटफॉर्म पर कम उम्र के बच्चे मौजूद रहे और उनकी उम्र तथा डेटा को लेकर कंपनी ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
क्या Instagram और Facebook में बदलाव हो सकता है?
अगर अदालत Meta के खिलाफ फैसला देती है, तो कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म के कुछ डिजाइन और सुरक्षा उपायों में बदलाव करना पड़ सकता है।
इनमें बच्चों की उम्र की पहचान बेहतर करना, कम उम्र के यूजर्स के लिए ज्यादा सुरक्षा, डेटा कलेक्शन पर नियंत्रण और कुछ ऐसे फीचर्स में बदलाव शामिल हो सकते हैं जिनसे यूजर्स का स्क्रीन टाइम बढ़ता है।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि Facebook और Instagram का पूरा डिजाइन बदल जाएगा। यह अदालत के अंतिम फैसले और उसके निर्देशों पर निर्भर करेगा।
Meta के पूर्व कर्मचारी ने भी उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान Meta के पूर्व कर्मचारी Arturo Béjar ने भी गवाही दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के अंदर बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठाई गई कुछ चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
उनका दावा है कि Meta के पास कम उम्र के यूजर्स की पहचान करने के लिए कुछ तकनीकी क्षमताएं थीं, लेकिन उनका इस्तेमाल पर्याप्त तरीके से नहीं किया गया। Meta ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
पहले भी Meta को लग चुका है बड़ा झटका
यह Meta के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा पहला बड़ा कानूनी मामला नहीं है। अगस्त 2026 में न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने Meta को बच्चों और युवाओं से जुड़े मामले में 567 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त भुगतान और कई सुरक्षा उपायों का आदेश दिया था। इससे संबंधित कुल वित्तीय देनदारी 942 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।
अदालत ने वहां उम्र की पहचान बेहतर करने, बच्चों के डेटा को हटाने और युवाओं की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कई उपायों के निर्देश दिए।
कितना बड़ा हो सकता है नुकसान?
मौजूदा अमेरिकी मुकदमे में Meta पर संभावित आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक मामले में संभावित दंड अरबों डॉलर से लेकर बेहद बड़े स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि अंतिम राशि अदालत के फैसले और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी।
सिर्फ Meta नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री पर असर
इस मामले का असर केवल Facebook और Instagram तक सीमित नहीं रह सकता। अमेरिका में TikTok, Snapchat और YouTube जैसी दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों को भी बच्चों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है।
अगर अदालतें टेक कंपनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाती हैं, तो भविष्य में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित डिजाइन तैयार करने, उम्र की बेहतर जांच करने और डेटा प्राइवेसी को मजबूत करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
क्या Facebook-Instagram सच में बदल जाएंगे?
अभी इसका जवाब तय नहीं है। लेकिन Meta के खिलाफ चल रहे मुकदमों से एक बात साफ है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं, बल्कि कानूनी और सामाजिक मुद्दा भी बन चुकी है।
अगर अमेरिकी अदालतें Meta को अपने प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव करने का आदेश देती हैं, तो इसका असर भविष्य में सोशल मीडिया के डिजाइन और बच्चों के लिए बनाए जाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमों पर भी पड़ सकता है।
नोट: इस लेख में दिए गए आरोप अदालत में चल रहे मामलों और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं। Meta ने आरोपों से इनकार किया है। अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।