स्वतंत्र भारद्वाज के कबूलनामे से गरमायी सियासत, पार्लियामेंट स्ट्रीट में सीजेपी का प्रदर्शन

स्वतंत्र भारद्वाज के लम्बे हाथ क्या प्रधानमंत्री, चिराग पासवान और कपिल मिश्रा तक हैं?

Swatantra Bhardwaj

Courtesy: AI

नयी दिल्ली। मैं आपके सामने एक ऐसे मामले को लेकर आया हूँ जिसको लेकर देश, खासकर दिल्ली की राजनीति गर्मा गयी है। एक ऐसे शख्स का दुस्साहस जिसने खुलेआम कहा— "मैंने उसका सिर फोड़ दिया, उसे 60 टांके आये, मामला सीधे-सीधे धारा 307 यानी जान से मारने की कोशिश का बनता था, लेकिन कानून मेरा बाल भी बांका नहीं कर पाया। मैं रात भर खुलेआम घूमता रहा क्योंकि मेरे सिर पर बड़े नेताओं का हाथ है!" इसे सुनकर आपको भले ही लग रहा हो यह किसी फिल्मी विलेन का डायलॉग है। लेकिन, आप जो सोच रहे हैं वो सही नहीं है। हकीकत यह है कि खुद को सुपर पावर की तरह पेश करनेवाले स्वतंत्र भारद्वाज का ये खुलेआम कबूलनामा है। खुद को हिन्दुत्ववादी इन्फ्लुएंसर बतानेवाला स्वतंत्र भारद्वाज, जिसने एक हालिया पॉडकास्ट में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कानून की धज्जियां उड़ाने की बात गर्व से स्वीकार की है।
 
पॉडकास्ट वीडियो के सामने आते ही देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दल, खासकर राहुल गांधी ने सरकार और दिल्ली पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वहीं, स्वतंत्र भारद्वाज ने अब इस मामले में मुस्लिम समुदाय का नाम घसीटते हुए एक नया पैंतरा चला है। आज की इस वीडियो में हम इस पूरे विवाद की परत-दर-परत खोलेंगे। जानेंगे कि आखिर यह CJP प्रोटेस्ट क्या था? स्वतंत्र भारद्वाज ने क्या दावे किये? राहुल गांधी और विपक्ष का इस पर क्या स्टैंड है? और सबसे बड़ी बात, दिल्ली पुलिस इस पर क्या कह रही है? वीडियो को आखिर तक जरूर देखिएगा। 

आखिर क्या है पूरा मामला? इसे समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। यह पूरा विवाद दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र और युवा प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। वहां छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, जिसे CJP प्रोटेस्ट कहा गया। आरोप है कि इस प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग सादे कपड़ों में लाठियां लेकर घुसे और छात्रों के साथ-साथ उनके परिजनों पर बेरहमी से हमला कर दिया। इसी हमले में छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके सिर पर इतनी गहरी चोट आयी थी कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा और डॉक्टरों को करीब 60 टाँके लगाने पड़े। उस वक्त तो यह मामला दब गया या पुलिसिया जांच के चक्कर में उलझा रहा। लेकिन, अब सितम्बर के इस हफ्ते में सोशल मीडिया पर एक पॉडकास्ट वायरल हुआ, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज नाम के शख्स ने कैमरे के सामने हंसते हुए दावा किया कि निशु आजाद के पिता का सिर उसी ने फोड़ा था! 
 
इस पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने जो बातें कहीं, वो भारतीय कानून व्यवस्था और पुलिस तंत्र की साख पर सीधे चोट करती हैं। भारद्वाज ने बड़े गर्व से दावा किया कि बंदा एम्बुलेंस में लगभग मरने की स्थिति में था। हाफ मर्डर का केस दर्ज होना चाहिए था, लेकिन वह जेल नहीं गया। यहाँ बंदा शब्द का इस्तेमाल भारद्वाज ने निशु के पिता के लिए किया था।जेल नहीं जाने की वजह बताते हुए उसने अपने राजनीतिक रसूख का हवाला दिया। भारद्वाज ने कहा कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा का फोन आ गया और उसे छोड़ दिया गया। उसने कहा— "कपिल मिश्रा मेरे भाई हैं, चिराग पासवान भाई हैं, और पीएम मोदी हमारे बड़े भाई हैं"। इतना ही नहीं, उसने यह तक दावा कर दिया कि "हम बिना किसी फॉर्म को भरे दिल्ली पुलिस बनकर घूमते हैं, हमारे पास दिल्ली पुलिस की हर चीज है, यहाँ तक कि उनके जूते भी"। 

जरा सोचिए, एक आरोपी सरेआम कैमरे पर यह दावा कर रहा है कि सत्ताधारी दल के नेताओं के आशीर्वाद के कारण पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हालांकि, इन बयानों की सच्चाई कितनी है, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। जब इस वीडियो पर चौतरफा हंगामा शुरू हुआ और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू किया, तो स्वतंत्र भारद्वाज बैकफुट पर आ गया। उसने तुरंत मीडिया के सामने आकर एक नया पैंतरा चला। भारद्वाज ने इस हमले को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश करते हुए दावा किया कि वह कोई हमला नहीं था, बल्कि उसका सेल्फ डिफेंस यानी आत्मरक्षा था। 

अपने नये बयान में स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि प्रदर्शन की आड़ में भीड़ में कई सारे मुस्लिम समुदाय के लोग आ गए थे, जो उसे मारना चाहते थे। अगर वह हाथ नहीं उठाता, तो खुद मारा जाता। साथ ही, बड़े नेताओं के नाम लेने पर उसने सफाई दी कि वह सिर्फ एक 'सरकैज्म' यानी व्यंग्य था। उसने कहा कि वह तो मजाकिया लहजे में कह रहा था कि उसे राहुल गांधी या शाहरुख खान ने जेल से छुड़ाया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या गंभीर आपराधिक कृत्यों को 'सरकैज्म' कहकर टाला जा सकता है? 

इस कबूलनामे के बाद देश के सियासी गलियारों में भारी आक्रोश है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक नजर आ रहे हैं। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना साबित करती है कि सत्ता के संरक्षण में गुंडे बेखौफ घूम रहे हैं और पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा है। राहुल गांधी ने स्वतंत्र भारद्वाज की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है और चेतावनी दी है कि जब तक निशु आजाद और उनके पिता को न्याय नहीं मिल जाता, कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। 

इधर, छात्र संगठनों और CJP के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की सड़कों पर उतरकर जबरदस्त धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पदर्शनकारियों का हुजूम संसद मार्ग छात्रों का कहना है कि अगर खुद को पुलिस बताने वाले और सरेआम हिंसा की बात कबूलने वाले अपराधी बाहर घूमेंगे, तो देश में कानून का राज कैसे रहेगा? प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की है। बढ़ते दबाव को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। पुलिस का कहना है कि निशु आजाद के पिता की शिकायत पर पहले ही चार्जशीट फाइल की जा रही है और वायरल वीडियो के आधार पर स्वतंत्र भारद्वाज से पूछताछ की जा रही है। 

स्वतंत्र भारद्वाज का यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत झड़प का नहीं है। यह लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और सबसे बढ़कर देश की कानून व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। क्या कोई भी व्यक्ति किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का नाम लेकर कानून अपने हाथ में ले सकता है? क्या सरेआम किसी का सिर फोड़कर 'सरकैज्म' या 'सेल्फ डिफेंस' का बहाना बनाना जायज है? 

दिल्ली पुलिस और कोर्ट इस मामले में क्या कार्रवाई करती है, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि स्वतंत्र भारद्वाज के दावों में सच्चाई है, या यह सिर्फ सुर्खियां बटोरने का एक जरिया है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमें जरूर बताएं। अगर आपको यह रिपोर्ट निष्पक्ष और जानकारी से भरपूर लगी हो, तो इसे लाइक करें, दोस्तों के साथ शेयर करें और हमारे वेबसाइट को सब्सक्राइब करना न भूलें।