दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैम्पस के समीप इमारत ढहने से 6 की मौत तीन दर्जन घायल

दिल्ली सरकार और एमसीडी सरकार पर उठ रहे सवाल, विद्यार्थी परिषद ने दिया धरना

Buildind

Courtesy: Google

नयी दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत के अचानक भरभराकर गिर जाने से 6 लोगों की मौत हो गयी और लगभग तीन दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। 11 लोगों को रेस्क्यू कर निकाला गया, जिनमें दो की हालत चिंताजनक बतायी जा रही है।​ दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैम्पस के पास स्थित यह इमारत छात्रों के लिए पीजी एकोमेंडेशन के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे के बाद बड़े पैमाने पर रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया गया। दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्नि सेवा, एनडीआरएफ, डीडीएमए, एमसीडी और दूसरी इमरजेंसी एजेंसीज ने मौके पर पहुँचकर मलबे में फँसे लोगों को निकालने का काम शुरू किया। रेस्क्यू आपरेशन के दौरान मलबे में फँसे एक छात्र का SOS वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह मलबे के नीचे से मदद मांगता दिखाई दे रहा है।

सवाल है कि आखिर इमारत गिरी कैसे? शुरुआती जानकारी के मुताबिक करीब 40 साल पुरानी इस इमारत के बेसमेंट में मरम्मत और नवीनीकरण का काम चल रहा था। बेसमेंट में पानी जमा होने की बात भी सामने आयी है। जाँच करनेवाले अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बेसमेंट में चल रहे काम, जलभराव और इमारत की स्थिति का उसके ढहने से कितना सम्बंध था? यानी फिलहाल किसी एक वजह को अंतिम कारण कहना जल्दबाजी होगी। इमारत में अवैध निर्माण और अतिरिक्त फ्लोर को लेकर जांच हो रही है। MCD ने आसपास की अन्य इमारत को भी खतरनाक स्थिति में पाये जाने के बाद उन्हें सील करने की कार्रवाई की है। बताया जाता है जो इमारत ढही है, उसमें चल रहे पीजी में 13 छात्र पंजीकृत थे। 

मामला सिर्फ इमारत ढहने का नहीं, बल्कि इमारत की सुरक्षा और उसकी नियमित निगरानी का भी है। हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिये और उक्त इमारत के मालिक के खिलाफ प्रा​थमिकी दर्ज करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री के आदेश पर पुलिस ने मकानमालिक और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया, वहीं एमसीडी की तरफ से अवैध निर्माण पर कार्रवाई तेज करने की बात कही गई है। चार से ज्यादा मंजिल वाली अवैध निर्माण को तुरंत सील करने के निर्देश दिये गए हैं और जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। बड़ा सवाल यह है कि अगर इमारत में अवैध निर्माण हो रहा था, तो क्या उसकी पहचान हादसे से पहले नहीं होनी चाहिए थी? क्या नियमित जाँच हो रही थी? अगर इमारत की सुरक्षा में कोई कमी थी, तो वहां पीजी चलाने की अनुमति किसने दी और उसकी निगरानी कैसे नहीं की गई?

हादसे के बाद राजनीतिक और छात्र संगठनों की तरफ से भी जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने एमसीडी मुख्यालय के बाहर धरना दिया और एमसीडी आयुक्त संजीव खीरवार के इस्तीफे की मांग की। अखिल भारतीय छात्र संगठन (NSUI) की तरफ से भी अथॉरिटी पर सवाल उठाये गए हैं। एनएसयूआइ अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा है कि जो इमारत ढही है उसका सम्बंध भाजपा के एक विधायक से है। राजनीतिक आरोपों से अलग अब सबसे जरूरी सवाल जाँच का है— इमारत का वास्तविक मालिक कौन था? उसे उपयोग में लाने की अनुमति किसने दी और निर्माण कार्य किस तरह चल रहा था? इमारत की स्थिति क्या थी और क्या किसी अथॉरिटी को पहले से इसकी जानकारी थी? इन सवालों के जवाब मजिस्ट्रेट और पुलिस जाँच से ही सामने आयेगा।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छाात्र पीजी और किराये के मकान में रहते हैं। पिछले साल ओल्ड राजेन्द्र नगर में एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से यूपीएससी की तैयारी करनेवाले तीन प्रतिभागियों की मौत हो गयी थी। इसके बाद भी छात्रों के आवास, बेसमेंट सेफ्टी और नियमित जाँच  को लेकर बड़े सवाल उठे थे। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बिल्डिंग क्यों गिरी, बल्कि यह भी है कि क्या दिल्ली में असुरक्षित और अवैध इमारतों की पहचान हादसे से पहले हो रही है? अगर नहीं, तो निगराणी प्रणाली में कमी कहां है? फिलहाल जाँच जारी है और अंतिम कारण तथा जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में इमारत की सुरक्षा, अवैध निर्माण और पीजी आवास की निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।