समाज में विभाजन और अराजकता फैलानेवाले 'दिमागी नक्सली' आज भी सक्रिय हैं : PM

समाज में विभाजन और अराजकता फैलाने वाले 'दिमागी नक्सली' आज भी सक्रिय

समाज में विभाजन और अराजकता फैलानेवाले 'दिमागी नक्सली' आज भी सक्रिय हैं : PM

Courtesy: खबरगांव

नयी दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को सम्बोधित करते हुए एक नये शब्द 'दिमागी नक्सल' का ईजाद किया। प्रधानमंत्री ने 'अर्बन नक्सल' की सोच को आगे बढ़ाते हुए एक नया शब्द 'दिमागी नक्सल' (Ideological or mental Maoist) दिया है। उन्होंने देशवासियों को सचेत किया कि भले ही जंगलों से हथियारी नक्सलवाद का खात्मा हो गया है, लेकिन समाज में विभाजन और अराजकता फैलाने वाले 'दिमागी नक्सली' आज भी सक्रिय हैं। 


हथियारी नक्सलवाद अंतिम सांसें गिन रहा है। पीएम मोदी ने बताया कि नक्सलवाद और माओवाद ने दशकों तक देश के लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया और सुरक्षा में तैनात हमारे करीब साढ़े तीन हजार (3,500) से अधिक जवान शहीद हुए। सरकार के प्रयासों से अब प्रभावित क्षेत्रों में विकास का तिरंगा लहरा रहा है और हथियारी नक्सलवाद देश में अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। जंगलों से उनका लगभग सफाया हो चुका है। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दशकों तक माओवादी मानसिकता के लोग सत्ता के गलियारों में सलाहकार कमेटियों के रूप में नीति-निर्धारण को प्रभावित करते रहे। 'अर्बन नक्सल' से 'दिमागी नक्सल' तक का खतरा और वैचारिक माओवाद ने देश को काफी नुकसान पहुँचाया है। बंदूक वाले नक्सली तो खत्म हो चुके हैं, लेकिन 'दिमागी नक्सल' समाज को गलत रास्ते पर ले जाने और युवाओं को देश के विचारों के खिलाफ भड़काने के लिए नए-नए दांव चल रहे हैं। ऐसे लोग ताक में बैठे हैं। ये लोग देश में अशांति, हिंसा और विभाजन का माहौल बनाने के लिए मौके की तलाश में रहते हैं। युवाओं को गुमराह करने की साजिश सरकार कामयाब नहीं होने देगी। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से अपील की कि समाज को गर्त में ले जानेवाले इन 'दिमागी नक्सलियों' की पहचान करना बेहद जरूरी है और इन्हें समाज से पूरी तरह अलग-थलग (Isolate) कर देना चाहिए। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में जुड़ने का आह्वान किया और कहा कि युवाओं का मन बहुत कोमल होता है। इसलिए, युवाओं को इन ताकतों के बहकावे में आने से बचना होगा और 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को पूरा करने के लिए देश की मुख्यधारा से जुड़ना होगा।