योगगुरु बाबा रामदेव ने की Gen-Z युवाओं के आंदोलन को लेकर तीखी टिप्पणी

सड़कों पर हंगामा, तोड़फोड़ और गाली-गलौज से देश आगे नहीं बढ़ता

योगगुरु बाबा रामदेव ने की Gen-Z युवाओं के आंदोलन को लेकर तीखी टिप्पणी

Courtesy: iChowk.in

नयी दिल्ली। योगगुरु बाबा रामदेव ने छात्र प्रदर्शनों और Gen-Z युवाओं के आंदोलन को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर हंगामा, तोड़फोड़ और गाली-गलौज से देश आगे नहीं बढ़ता है। देश संसद से चलता है, सड़कों की भीड़ या दबाव से नहीं। हालांकि, उन्होंने सरकारी नौकरियों और शिक्षा—व्यवस्था में भ्रष्टाचार एवं पेपर लीक जैसी कमियों को भी स्वीकार किया।

योगगुरु ने कहा, युवाओं द्वारा विरोध के नाम पर गाली-गलौज और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है। युवाओं को 'गालीबाज' के बजाय 'हुनरबाज' बनना चाहिए। उन्होंने माना कि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं (बिजली, पानी, शिक्षक) की कमी है और सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू एवं भर्ती प्रक्रियाओं में भारी भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद होता है। योगगुरु रामदेव ने पेपर लीक और नकल करानेवालों के लिए मृत्युदंड (फांसी) जैसे कड़े कानूनों की वकालत भी की।

छात्र आंदोलनों और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों पर बाबा रामदेव के बयानों को लेकर विपक्ष और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। विपक्षी नेताओं ने उनके बयानों को लोकतांत्रिक असहमति के अधिकार को दबानेवाला और जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकानेवाला बताया है। VBA प्रमुख प्रकाश अम्बेडकर ने बाबा रामदेव के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'बेतुका' (Absurd) करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों का उद्देश्य परीक्षा में पेपर लीक जैसे गंभीर और वैध व्यवस्थागत मुद्दों से ध्यान भटकाना और नागरिकों के लोकतांत्रिक असहमति के अधिकार को कमजोर करना है। वहीं, विभिन्न छात्र संगठनों का तर्क है कि वे NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली एवं पेपर लीक जैसी व्यवस्था की नाकामियों के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके अनुसार, विरोध प्रदर्शनों को केवल कुछेक बयानों के आधार पर पूरी तरह खारिज करना अनुचित है।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बाबा रामदेव के समर्थकों ने इस बात का समर्थन किया कि लोकतंत्र में मर्यादा और शालीनता का पालन होना चाहिए तथा विरोध के नाम पर अमर्यादित भाषा या देश की छवि को नुकसान पहुँचानेवाले कृत्यों से बचना चाहिए।