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नयी दिल्ली। सनातन धर्म में श्रावण मास का बड़ा महत्व है। इस महीने महादेव की आराधना का महत्व तो है ही, भाई—बहन के अटूट प्रेम की निशानी के रूप में अनंत काल से चले आ रहे रक्षाबंधन के त्योहार के लिए भी इस महीने का विशेष महत्व है। रक्षाबंधन कब, कैसे और क्यों मनाया जाता है इसे जाने बिना रक्षाबंधन त्योहार को मनाने का महत्व नहीं है। इस बार रक्षाबंधन का त्योहार मनाने का शुभ मुहूर्त क्या है और राखी बांधने के दौरान किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए, इस पर नजर डालना जरूरी है।
सिर्फ धागे को बांधने का रिवाज नहीं
रक्षाबंधन केवल एक धागे को बांधने का रिवाज नहीं है, बल्कि भाई और बहन के निश्छल प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लम्बी उम्र, स्वास्थ्य और सफलता की कामना करती हैं। भाई अपनी बहनों को तोहफा देते हैं और जीवन भर हर सुख—दुख में उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। यह हमारी संस्कृति में रिश्तों के सम्मान और परिवार के महत्व को रेखांकित करता है।
रक्षाबंधन और जन्मकुंडली
जन्मकुंडली में तीसरे घर का मुख्य कारक ग्रह मंगल है। यह घर पराक्रम, साहस, भाई-बहन (विशेषकर छोटे भाई-बहन), बुद्धि और ऊर्जा का प्रतीक है। मंगल की प्रकृति भी आक्रामक, साहसी और ऊर्जावान होती है, इसलिए इस भाव के प्राकृतिक कारक मंगल माने गए हैं। इस घर का सम्बंध (कनेक्शन) बहन से माना जाता है। जबकि छठे घर का सम्बंध भाई से माना गया है। छठे घर के मुख्य कारक ग्रह मंगल और शनि दोनों हैं। यह घर रोग, ऋण, शत्रु, प्रतियोगिता, और दैनिक सेवा (नौकरी) का प्रतिनिधित्व करता है। संघर्ष, अनुशासन और शत्रुओं पर विजय पाने की क्षमता शनि और मंगल की ऊर्जा से ही नियंत्रित होती है, इसलिए इन दोनों ग्रहों को इस भाव का विशेष कारक माना गया है। अगर भाई के साथ आपके बहुत अच्छे सम्बंध (रिलेशन) हैं तो आपको मंगल से मिलने वाले शुभ फल मिलते रहेंगे।
रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त
श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जानेवाला रक्षाबंधन का त्योहार इस बार 28 अगस्त को मनाया जायेगा। हालांकि पूर्णिमा 27 अगस्त को है। लेकिन, इस रोज, यानी 27 अगस्त को भद्रा काल साढ़े बारह घंटे है, सुबह के 9 बजे से रात के 9 बजकर 30 मिनट तक। 28 अगस्त को इसका असर देखने को नहीं मिलेगा। परंतु, 28 अगस्त को एक व्यवधान है और वह व्यवधान है राहु काल। 28 अगस्त को राहुकाल भी है, सुबह 10 बजकर 45 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक। इस समय राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है। राहु काल में बहनें अपने भाई को राखी बिल्कुल नहीं बांधें। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह के 5 बजकर 45 मिनट से सुबह के 9 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर में है। 1 बजकर 40 मिनट से 4 बजकर 15 मिनट तक। तीसरा मुहूर्त शाम 6 बजकर 29 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक का है। यह बहुत ही शुभ मुहूर्त है। राखी इस समय पर ही बांधें।
तिलक का महत्व
राखी बांधते समय बहनें अपने भाई को तिलक जरूर लगाएँ। केसर का तिलक समृद्धि का कारक होता है। केसर का तिलक लगाने से समृद्धि आती है। इसलिए भाई के सुखी जीवन के लिए उन्हें केसर का तिलक जरूर लगाएँ। हल्दी का भी तिलक जरूर लगाएँ। इससे उनका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। उनके सारे रोग नष्ट हो जायेंगे और वह निरोगी रहेंगे। भाई—बहन के प्रेम को आजीवन बने रहने के लिए चावल यानी अक्षत का तिलक भी जरूर लगाएँ। अक्षत का अर्थ होता है जिसकी क्षति नहीं हो सकती। अक्षत लगाने से भाई—बहन का प्रेम अखंड बना रहता है।
यह त्यौहार केवल भाई बहनों तक ही सीमित नहीं है। एक दूसरे की रक्षा करने, महिलाओं को सम्मान देने और आपस में भाईचारे का संदेश देने का भी जरिया बन चुका है। रक्षाबंधन में रिश्तों की मिठास को हमेशा बनाए रखें और समाज में हर बहन और महिला के प्रति सम्मान और सुरक्षा का भाव रखें।