क्या है प्री ईएमआई और क्या हैं इसके फायदे?

क्या है प्री ईएमआई और क्या हैं इसके फायदे?

क्या है प्री ईएमआई और क्या हैं इसके फायदे?

अगर आप होम लोन की सुविधा उठाकर कोई अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो उस स्थिति में बैंक की तरफ से आपको प्री ईएमआई का विकल्प मिलता है। संभव है ईएमआई यानी इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट शब्द युग्म से तो आप परिचित हों लेकिन प्री ईएमआई टर्म समझने में आपको कठिनाई हो। तो पहले इसे ही समझ लेते हैं। अगर आप या कोई व्यक्ति किसी अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में कोई संपत्ति खरीदता है तो उस स्थिति में बैंक की तरफ से उस सपंत्ति की कुल कीमत का भुगतान एक बार में नहीं किया जाता है बल्कि जैसे जैसे उस प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन बढ़ती जाती है उसी अनुपात में बैंक की तरफ से लोन की राशि ग्राहक के खाते में या डाल दी जाती है। अब बैंक की तरफ से ग्राहक के पास यह विकल्प रहता है कि प्रॉपर्टी की कंस्ट्रक्शन के दौरान जितनी रकम उसे बैंक से मिलती है वह प्री ईएमआई के तौर पर मासिक रूप से बैंक को उसका भुगतान लौटा भी सकता है। जाहिर है इसे लेकर आपके जेहन में यही बात आ रही हो कि ऐसा करने से क्या फायदे होंगे? आइये जानते हैं

प्री-ईएमआई का लाभ और नुकसान 

प्री-ईएमआई विकल्प का सबसे बड़ा लाभ यह है कि शुरू में ईएमआई यानी मासिक किस्त की राशि कम होती है। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जिनकी आय अभी सीमित है या जो निर्माण के दौरान अन्य खर्चों को मैनेज करना चाहते हैं। हालांकि, प्री-ईएमआई में कुल ब्याज भुगतान अधिक हो सकता है क्योंकि मूलधन का भुगतान बाद में शुरू होता है। यदि परियोजना में देरी होती है, तो प्री-ईएमआई भुगतान की अवधि बढ़ सकती है, जिससे कुल लागत बढ़ सकती है। 

फुल ईएमआई के फायदे 

फुल ईएमआई में ब्याज और मूलधन दोनों का भुगतान तुरंत शुरू होता है, जिससे लोन की अवधि कम हो जाती है और कुल ब्याज का बोझ भी घटता है। इस विकल्प का एक और फायदा यह है कि यह कर लाभ में अधिक लाभदायक होता है। इसमें आप आयकर अधिनियम की धारा 80C और 24(b) के तहत ब्याज और मूलधन दोनों पर टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं। इसके विपरीत, प्री-ईएमआई में केवल ब्याज भुगतान पर ही कर लाभ मिलता है और वह भी तब जब घर का निर्माण पूरा हो जाता है।

कैश फ्लो पर नियंत्रण 

प्री-ईएमआई उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो निर्माण के दौरान नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) को नियंत्रित करना चाहते हैं। इस विकल्प में शुरुआती ईएमआई कम होती है, जिससे वित्तीय दबाव कम रहता है। दूसरी ओर, फुल ईएमआई उन लोगों के लिए बेहतर है जो जल्दी ऋण मुक्त होना चाहते हैं और अधिक ब्याज भुगतान से बचना चाहते हैं। इस विकल्प में कुल लागत कम होती है और लोन का कार्यकाल भी छोटा रहता है। इसके अलावा, फुल ईएमआई में निर्माण में देरी का जोखिम भी कम होता है क्योंकि मूलधन का भुगतान तुरंत शुरू हो जाता है।

इसका रखें ध्यान 

आपके लिए कौन सा विकल्प उचित रहेगा, यह आपकी वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर निर्भर करता है। अगर आप निर्माण के दौरान कम खर्च चाहते हैं और वित्तीय दबाव से बचना चाहते हैं, तो प्री-ईएमआई एक अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर आप जल्दी कर्ज मुक्त होना चाहते हैं और कुल ब्याज का बोझ कम करना चाहते हैं, तो फुल ईएमआई बेहतर है। निर्णय लेने से पहले अपनी आय, खर्च और दीर्घकालिक लक्ष्यों का सही आकलन करें। इसके अलावा, होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर का उपयोग करके संभावित खर्च का अनुमान लगाएं और जरूरत हो तो वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें। 

प्रदीप मिश्रा 
(लेखक संपत्ति मामलों के विशेषज्ञ हैं)