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मुम्बई। महाराष्ट्र सरकार के निर्देश पर राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने जनस्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक और बेहद सख्त फैसला लिया है। 3 सितम्बर 2026 से पूरे राज्य में लागू हुए नये नियमों के तहत अब किसी भी बड़े धार्मिक, सामाजिक या निजी सामूहिक भोजन आयोजन अर्थात (शादी की दावत, भंडारा, लंगर, महाप्रसाद और इफ्तार पार्टी) से पहले आयोजकों को FDA से अनिवार्य रूप से अनुमति लेनी होगी।
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे द्वारा तैयार की गई इस नयी कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान होनेवाली मिलावट पर रोक लगाना तथा नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है। सरकार के इस कदम से राज्य में खाद्य सुरक्षा प्रबंधन का एक नया ढांचा तैयार हो रहा है।
अनुमति लेना अनिवार्य क्यों?
महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जहां वर्षभर बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक उत्सव मनाये जाते हैं। होली, दिवाली, ईद, बकरीद, नवरात्रि, शिवरात्रि और गणेशोत्सव जैसे त्योहारों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु भंडारे, लंगर, महाप्रसाद और इफ्तार पार्टियों में शामिल होते हैं। अतीत में ऐसे बड़े सामूहिक भोजों में फूड पॉइजनिंग और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की कई घटनाएं सामने आयी हैं। चूंकि इन आयोजनों में भोजन दूर-दूर से आनेवाले आम नागरिक और श्रद्धालु ग्रहण करते हैं, इसलिए उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता के मानकों को कड़ाई से बनाये रखना है।
'इयर-लॉन्ग एक्शन प्लान' और फूड सेफ्टी कैलेंडर
त्योहारों के समय FDA अब तक केवल अल्पकालिक या तात्कालिक छापे मारता था। लेकिन इसबार महाराष्ट्र FDA ने देश में पहली बार पूरे साल का खाद्य सुरक्षा कैलेंडर और एक समान 'इयर-लॉन्ग एक्शन प्लान' जारी किया है। इसका मतलब यह है कि अब हर त्योहार के लिए अलग से नये आदेश जारी करने की जरूरत नहीं होगी। सालभर की निगरानी और कार्रवाई की रूपरेखा पहले से ही तय रहेगी, जिससे मिलावटखोरों पर पहले से ही नकेल कसी जा सकेगी। प्रमुख दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)FDA द्वारा जारी की गई नयी नियमावली के तहत आयोजकों और कैटरर्स के लिए निम्नलिखित कड़े नियम तय किये गए हैं।
पूर्व अनुमति और सूचना
किसी भी बड़े सामूहिक भोज अर्थात महाप्रसाद, लंगर, भंडारा, शादी की दावत आदि का आयोजन करने से पहले आयोजकों को आयोजन की पूरी जानकारी स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी को देनी होगी और आवश्यक अनुमति लेनी होगी। सार्वजनिक या निजी बड़े आयोजनों में भोजन बनाने और वितरित करने का जिम्मा केवल उन्हीं कैटरर्स को दिया जा सकेगा, जिनके पास वैध FDA लाइसेंस है। बिना लाइसेंसवाले रसोइयों या कैटरर्स से खाना बनवाना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
खाद्य स्वच्छता का प्रशिक्षण
आयोजकों और उनके कर्मचारियों को भोजन प्रबंधन और स्वच्छता (Food Hygiene) के सम्बंध में FDA द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जायेगा ताकि भोजन बनाने से लेकर परोसने तक स्वच्छता बनी रहे। त्योहारों के दौरान मांग में भारी उछालवाले खाद्य पदार्थों— जैसे खोआ, पनीर, घी, दूध, खाद्य तेल, बेसन, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े का आटा और सूखे मेवे की विशेष रूप से गहन जांच की जायेगी। इस व्यापक अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए FDA ने एक चार-स्तरीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली लागू की है, जो त्योहारों और आयोजनों को तीन हिस्सों में कवर करती है।
त्योहार/उत्सव-पूर्व निगरानी
किसी भी बड़े त्योहार या आयोजन से 21 दिन पहले ही FDA सक्रिय हो जाएगा। अधिकारी उन संभावित जगहों और सामग्रियों की पहचान करेंगे जहां मिलावट की गुंजाइश सबसे ज्यादा होती है। इसके तहत थोक बाजारों, मिलों, कोल्ड स्टोरेज और निर्माण इकाइयों का औचक निरीक्षण किया जाएगा।
आयोजन के दौरान बाजार निगरानी
त्योहारों और आयोजनों के दिनों में FDA की टीमें बाजारों, मिठाई की दुकानों, भोजनालयों और भंडारा स्थलों का खुद दौरा करेंगी। वहां 'ऑन-द-स्पॉट' फूड टेस्टिंग वैन के जरिए खाने के सैम्पल की तुरंत जांच की जाएगी और उपभोक्ताओं से मिलनेवाली शिकायतों पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा।
कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई
मानकों का उल्लंघन करनेवाले कैटरर्स और आयोजकों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
विशेष उपवास, खाद्य पदार्थों पर पैनी नजर
महाराष्ट्र में नवरात्रि, महाशिवरात्रि और एकादशी जैसे व्रतों पर बड़ी संख्या में लोग उपवास रखते हैं। इस दौरान कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, भगर और राजगिरा जैसे 'फलाहारी' सामानों की बिक्री बढ़ जाती है। पूर्व में इन आटा श्रेणियों में फंगस या मिलावट के कारण कई लोग बीमार पड़े हैं। नये एक्शन प्लान के तहत इन विशिष्ट उपवास खाद्य पदार्थों की मिलों और दुकानों पर विशेष सघन जांच की जाएगी।