अयोध्या राम मंदिर को मिला पहला CEO, पूर्व एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्र को मिली जिम्मेदारी

अशोक सिंघल के करीबी रिश्तेदार महेश भागचंदका सहित तीन सदस्यों का भी हुआ चुनाव

Ram Mandir CEO

Courtesy: TFM

नयी दिल्ली। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में प्रशासनिक और संरचनात्मक सुधारों के तहत तीन नये ट्रस्टी सदस्यों की नियुक्ति की गई है। साथ ही, मंदिर प्रबंधन के लिए एक नया मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO)  भी नियुक्त किया गया है। यह बदलाव जुलाई 2026 में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद महासचिव चम्पत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे और विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के कारण खाली हुए पदों को भरने के लिए किये गए हैं। 

सितम्बर महीने की दो तारीख (बुधवार) को हुई ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में जिन तीन नये चेहरों को कमिटी में शामिल किया गया है, उनमें विश्व हिन्दु परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के करीबी रिश्तेदार दिल्ली के महेश भागचंदका, हाईकोर्ट में राम मंदिर पक्ष के वकील रह चुके अयोध्या के मदन मोहन पांडेय और उत्तरप्रदेश के शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के पद के लिए पूर्व एयर मार्शल जीतेन्द्र मिश्र का चयन किया गया है। 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए जीतेन्द्र मिश्र को 'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी भूमिका के लिए ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था। देवरिया के भोपतपुरा गांव से आनेवाले मिश्र ने 1986 में फाइटर स्ट्रीम से अपने सैन्य करियर की शुरुआत की थी।

यह पहला मौका है, जब 5 फरवरी 2020 के बाद  ट्रस्ट की डीड में संशोधन कर ट्रस्ट की कमान ट्रस्ट प्रमुख के बजाय मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के हाथों में रखे जाने का कानून बना। अब ट्रस्ट के प्रमुख के बजाय एक पेशेवर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक मामलों का संचालन करेगा। 

पूर्व महासचिव चम्पत राय और अनिल मिश्रा ने दान प्रबंधन में गड़बड़ी के आरोपों के बाद नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया था, जबकि एक पद विमलेन्द्र मोहन के निधन से रिक्त हुआ था। नये प्रशासनिक ढाँचे का उद्देश्य मंदिर के रोजाना संचालन और करोड़ों रुपये के चढ़ावे एवं वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।