तुकाराम मुंडे के खिलाफ अपनों ने ही किया विद्रोह; लगाये गम्भीर आरोप, मंत्री से की शिकायत

तुकाराम मुंडे के खिलाफ अपनों ने ही किया विद्रोह; लगाये गम्भीर आरोप, मंत्री से की शिकायत

तुकाराम मुंडे  के खिलाफ अपनों ने ही किया विद्रोह; लगाये गम्भीर आरोप, मंत्री से की शिकायत

‘महाराष्ट्र का सिंघम’ नाम से मशहूर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त (Commissioner) तुकाराम मुंडे (Tukaram Munde) के खिलाफ उनके ही 29 अफसरों ने विद्रोह कर दिया है। विद्रोह करने वाले अफसरों की शिकायत है कि मुंडे उनसे बहुत ज्यादा काम करवा रहे हैं। अफसरों ने इस सम्बन्ध में महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि सावित्रीबाई सीताराम ज़िरवाल (Narhari Savitribai Sitaram Zirwal) से भी शिकायत की है।भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी आयुक्त (Commissioner) तुकाराम मुंडे इन दिनों महाराष्ट्र में अपने ताबड़तोड़ कार्रवाई (Action) के लिए सुर्खियों में हैं। विद्रोह का पहला स्वर औरंगाबाद के छत्रपति संभाजी नगर में सामने आया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग की प्रयोगशाला के 29 अधिकारियों और कर्मचारियों ने तुकाराम मुंडे के काम करने के तरीके पर आपत्ति जतायी है। अधिकारियों का कहना है कि मुंडे ने दो शिफ्ट में काम करने का निर्णय लिया है। शनिवार-रविवार और सार्वजनिक छुट्टी के दिन भी काम करने का आदेश दिया है। अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि खाली पदों के कारण काम बढ़ गया है। काम के बोझ का असर नमूनों की जांच की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।


बड़े और छोटे कम्पनियों में हड़कम्प

तुकाराम मुंडे द्वारा की जा रही कार्रवाई से न केवल छोटे, बल्कि बड़ी ब्रांडेड कम्पनियों में भी हड़कम्प है। मुंडे मिलावटखोरों, बिना लाइसेंस के रेस्टोरेंट और होटलों के साथ क्लब पर एक्शन ले रहे हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश प्रभु (Suresh Prabhu) ने मुंडे की तारीफ की है। उनसे पहले अभिनेत्री काजल अग्रवाल (Kajal Agrawal) ने मुंडे के इस कदम का समर्थन किया था। शिवसेना (शिंदे) के नेता संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) की प्रतिक्रिया भी आयी है।संजय निरुपम ने कहा है कि एफडीआई का मकसद तो अच्छा है, लेकिन उनके तरीके बहुत कठोर हैं। उनके अधिकारी छापेमारी कर रहे हैं। वे तुरंत उनके फूड लाइसेंस (Food Licence) सस्पेंड (Suspend) कर रहे हैं। यह पूरी तरह गलत है और एक तरह से गैरकानूनी भी है। लाइसेंस सस्पेंड करने से पहले एफडीए (FDA) को ऑपरेटरों को नोटिस देना चाहिए और नियमों का पालन करने के लिए एक समय-सीमा तय करनी चाहिए। अगर नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो फूड लाइसेंस को सिर्फ सस्पेंड नहीं, बल्कि रद्द (Cancel) कर देना चाहिए। इसी तरह पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने भी मुंडे द्वारा की जा रही कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा है, मैं महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे के उस शानदार अभियान की सराहना करता हूं, जिसका मकसद सभी के लिए सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी का भोजन उपलब्ध कराना है। जन-स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए और यह जरूरी है कि इससे जुड़े सभी लोग इस मकसद के प्रति समर्पित रहें।

क्यों मचा हड़कम्प?

स्कूलों के आसपास (50 मीटर तक) जंक फूड को पूरी तरह प्रतिबंधित करते हुए स्कूलों के पास सॉफ्ट ड्रिंक्स, कोला, चिप्स, चॉकलेट और अन्य अस्वास्थ्यकर प्रोसेस्ड फूड बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गयी। वीआईपी क्लबों और बड़े होटलों में गंदगी पाये जाने पर उनकी अनुज्ञप्तियाँ (Licence) रद्द (Suspend) कर दी गयीं। साथ ही, हाईकोर्ट की कैंटीन का निरीक्षण कर बीएमसी (BMC) की कैंटीन सील कर दी गयी। मिलावटखोरों पर जुर्माने लगाये गये और उनके मालिकों को गिरफ्तारी की चेतावनी दी गयी। डेयरी और तेल माफिया पर कार्रवाई (Action) की गयी। नकली दूध, संदिग्ध पनीर और मिलावटी खाद्य तेल के खिलाफ राज्यव्यापी जब्ती अभियान चलाया।उच्च न्यायालय (High Court) ने एक्शन पर उठाये सवालहाल ही में कुछ कॉकरोच मिलने पर जब खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग ने मुम्बई के एक होटल का खाद्य लाइसेंस निलम्बित किया था तो अदालत (Court) ने कहा था कि केवल दो छोटे कीड़े मिलने के आधार पर किसी होटल का लाइसेंस निलंबित करना उचित नहीं माना जा सकता, क्योंकि हम भारत में हैं। अदालत ने एफडीए को कहा था कि वह व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाये।
 

कौन हैं तुकाराम मुंडे?

 
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी तुकाराम मुंडे महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग में आयुक्त (Commissioner) हैं। उन्होंने 25 मई 2026 को यह पद भार संभाला था। उनके 21 साल के प्रशासनिक करियर में यह उनका 25वाँ तबादला था। तुकाराम मुंडे की कहानी हरियाणा कैडर के 1991 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक खेमका (Ashok Khemka) की तरह ही है, जो अपनी बेबाकी, ईमानदारी और बार-बार होने वाले तबादलों (Transfer) के लिए पूरे देश में चर्चित रहे हैं। अपने 34 साल के लम्बे प्रशासनिक करियर में अशोक खेमका को लगभग 57 से अधिक बार तबादलों का सामना करना पड़ा था। अशोक खेमका सबसे ज्यादा सुर्खियों में तब आये, जब उन्होंने वर्ष 2012 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ (DLF) कम्पनी के बीच हुए गुरुग्राम जमीन सौदे के दाखिल-खारिज (Mutation) को रद्द कर दिया था। इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। बार-बार तबादले, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने और नियमों का सख्ती से पालन करने के कारण उन्हें अपने सेवाकाल के दौरान औसतन हर छह महीने में ट्रांसफर झेलना पड़ा, जिससे वह भारत के सबसे ज्यादा तबादलों का सामना करने वाले चर्चित अधिकारियों में गिने गये। खेमका को एक ईमानदार और विसिलब्लोअर (Whistleblower) अधिकारी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने विभिन्न विभागों में रहते हुए कई तरह की प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया था।