Courtesy: A. I.
New Delhi. भारत ने 18वें BRICS Summit की मेजबानी की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक ही मंच पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन समेत दूसरे सदस्य देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। दुनिया की नजर इस समिट पर थी। लेकिन, सवाल ये है कि विदेशी मीडिया ने इस पूरे BRICS Summit को किस नजरिये से देखा? और उससे भी बड़ा सवाल—जब BRICS का एजेंडा ग्लोबल पावर बैलेंस, अर्थव्यवस्था, व्यापार और बदलती विश्व—व्यवस्था पर था, तो विदेशी मीडिया का फोकस भारत की कुछ खास तस्वीरों पर क्यों टिक गया? आखिर इन तस्वीरों में ऐसा क्या खास था? और इनका इतनी तेजी से चर्चा में आना विदेशी मीडिया के लिए इतना अहम क्यों था?
एक तरफ भारत ने BRICS के मंच के जरिये यह संदेश देने की कोशिश की कि जब अमेरिका और पश्चिमी देशों से इतर दुनिया की बड़ी ताकतें एक साथ बैठती हैं, तो वैश्विक राजनीति की तस्वीर कैसे बदल सकती है। लेकिन दूसरी तरफ, कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में भारत को दिखाने के लिए जिन तस्वीरों का इस्तेमाल हुआ, उन पर सवाल उठे।
भारत की तेजी से बदलती Economy, Modern Cities और बड़े Infrastructure के बजाय तस्वीरों में सड़क पर Cycle चलाते लोग, सामान ढोते मजदूर और उनके पीछे BRICS Summit के posters ज्यादा दिखाई दिए। यानी सवाल सिर्फ तस्वीरों का नहीं है। सवाल ये है कि इन तस्वीरों के जरिये भारत की कौन-सी कहानी दुनिया के सामने रखी जा रही है? अब उन media outlets को भी देख लेते हैं, जिनकी reports और तस्वीरों को लेकर social media पर बहस हुई। The New York Times, Al Jazeera, South China Morning Post, The Herald Journal, AP और The Malaysian Reserve जैसी संस्थाओं की प्रकाशित reports में ऐसी तस्वीरें नजर आयीं, जिनमें सड़क पर Cycle चलाते या सामान ले जाते लोग दिखाई दे रहे थे और Background में BRICS Summit से जुड़े Posters मौजूद थे।
अब यहां एक बात समझना जरूरी है। गरीबी, असमानता या मजदूरों की तस्वीरें दिखाना अपने आप में गलत नहीं है। लेकिन सवाल तब उठता है, जब किसी देश की पूरी तस्वीर को बार-बार एक ही frame में समेट दिया जाए। भारत में गरीबी भी है, लेकिन भारत में सिर्फ गरीबी नहीं है। जिस देश में करोड़ों लोग Digital Payments करते हैं, बड़ी Tech और Manufacturing Companies Invest कर रही हैं, Infrastructure तेजी से बदल रहा है और जो खुद को Global South की आवाज के तौर पर पेश कर रहा है—उस भारत की तस्वीर सिर्फ सड़क किनारे के एक Frame से तय नहीं हो सकती।
शायद यही वजह है कि Social Media पर इन तस्वीरों को लेकर विदेशी Media की आलोचना शुरू हुई। कुछ Users ने सवाल उठाया कि क्या अलग-अलग Media Outlets भारत की एक जैसी तस्वीर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। एक User ने तो तंज कसते हुए लिखा कि Photojournalist Frame में गाय भी नहीं ला सके।
लेकिन, असली सवाल ये है कि क्या भारत को लेकर International Media की नजर अब भी पुराने Stereotypes से बाहर नहीं निकल पायी है? या फिर वही तस्वीरें ज्यादा चुनी जाती हैं, जो दुनिया के सामने भारत की पहले से बनी धारणा को और मजबूत करती हैं?
क्योंकि BRICS Summit की बड़ी कहानी थी— बदलती Global Order में BRICS की भूमिका, Global South की आवाज और भारत, रूस, चीन, ईरान समेत दूसरे देशों की बढ़ती भूमिका। लेकिन, अगर इन सवालों की जगह चर्चा सिर्फ भारत की कुछ तस्वीरों तक सिमट जाये, तो सवाल उठना लाजमी है— क्या BRICS Summit की बड़ी Geopolitical कहानी से विदेशी Media का फोकस भटक गया?
आप विदेशी Media द्वारा भारत की इन तस्वीरों के इस्तेमाल को किस नजरिये से देखते हैं? क्या ये Balanced Journalism है या भारत की Stereotypical Image? अपनी राय Comment Section में जरूर बताइए।