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नयी दिल्ली। आम आदमी पार्टी और CPI(M) ने राजस्थान के निकाय चुनावों में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है, जिसमें AAP ने 60 सदस्यीय बारां नगर परिषद में बहुमत हासिल किया और CPI(M) ने नोखा नगर पालिका के 45 वार्डों में से 29 पर जीत दर्ज की, ये परिणाम इस बात को रेखांकित करते हैं कि कांग्रेस दोनों स्थानीय निकायों में BJP के प्रमुख चुनौतीकर्ता के रूप में उभरने में विफल रही है। 14 सितम्बर को आये परिणामों के अनुसार, AAP ने बाराँ के 60 वार्डों में से 31 जीते, जबकि कांग्रेस ने 18, BJP ने नौ और निर्दलीयों ने दो वार्ड जीते। नोखा में CPI(M) ने 45 में से 29 वार्ड जीते, उसके बाद BJP ने 13 और निर्दलीयों ने तीन वार्ड जीते। कांग्रेस वहाँ एक भी वार्ड नहीं जीत सकी। राजस्थान में AAP और CPI(M) दोनों की राज्यव्यापी चुनावी मौजूदगी सीमित है, जहां राजनीति पर परम्परागत रूप से BJP और कांग्रेस का दबदबा रहा है।
AAP ने बाराँ में बहुमत कैसे हासिल किया?
AAP ने बाराँ नगर परिषद में अपने दम पर बहुमत का आँकड़ा पार किया, और उसके 60 में से 31 वार्ड जीते। कांग्रेस 18 सीटों के साथ काफी पीछे दूसरे स्थान पर रही, जबकि BJP ने नौ सीटें जीतीं। शेष दो सीटें निर्दलीयों ने जीतीं। बाराँ के 60 वार्डों में 217 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे। बहुमत के साथ, AAP के एक उम्मीदवार के परिषद अध्यक्ष बनने की उम्मीद है। चुनाव परिणाम राजस्थान की स्थानीय राजनीति में AAP को महत्वपूर्ण आधार देता है। पार्टी नगर परिषद में BJP और कांग्रेस दोनों से आगे रही, इसके बावजूद वह राज्य की दो पारम्परिक रूप से प्रभावशाली राजनीतिक ताकतों में अपनी स्थिति नहीं बना सकी।
CPI(M) राजस्थान के राज्य सचिव किशन पारिख ने पार्टी के प्रदर्शन का श्रेय स्थानीय और आर्थिक मुद्दों पर उसके अभियान को दिया और कहा कि क्षेत्र में मतदाताओं ने वामपंथ को एक विकल्प के रूप में देखा था। पारिख के अनुसार, पार्टी ने पूरे राजस्थान में 192 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिनमें से लगभग 40 ने अपने मुकाबले जीते।
कांग्रेस के लिए परिणाम महत्वपूर्ण क्यों हैं?
बाराँ और नोखा के नतीजे इसलिए खास हैं क्योंकि कांग्रेस द्वारा खोयी गई राजनीतिक जगह का सीधा लाभ BJP को नहीं मिला। इसके बजाय, दोनों निकायों में छोटी पार्टियाँ सबसे मजबूत ताकतों के रूप में उभरीं। बाराँ में कांग्रेस की 18 सीटें उसे AAP की 31 सीटों से काफी पीछे छोड़ गईं। नोखा में उसका खाता भी नहीं खुला, जबकि CPI(M) ने लगभग दो-तिहाई वार्डों पर जीत हासिल की। इसलिए ये दोनों परिणाम पारम्परिक BJP-कांग्रेस मुकाबले से आगे बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का स्थानीय संकेत देते हैं। नगर निकाय चुनाव स्थानीय उम्मीदवारों, संगठन और नागरिक मुद्दों से काफी प्रभावित होते हैं, और व्यक्तिगत निकायों के परिणाम जरूरी नहीं कि सीधे विधानसभा या लोकसभा मतदान के रुझानों में बदल जाएं।
CPI(M) की राजस्थान में मौजूदगी नोखा की जीत से पहले की है
नोखा में CPI(M) का प्रदर्शन राजस्थान में पार्टी के उन इलाकों में प्रभाव बनाये रखने की पृष्ठभूमि में आया है, जहां राज्यव्यापी स्तर पर उसका आधार अपेक्षाकृत छोटा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में CPI(M) के अमरा राम ने INDIA गठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ते हुए सीकर संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की। कांग्रेस ने सीकर CPI(M) के लिए, नागौर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता हनुमान बेनीवाल के लिए और बांसवाड़ा भारत आदिवासी पार्टी के नेता राजकुमार रोत के लिए छोड़ दिया था। तीनों गठबंधन सहयोगियों के उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी सीटें जीतीं। अमरा राम बाद में अप्रैल 2025 में CPI(M) पोलित ब्यूरो में शामिल होने वाले राजस्थान के पहले मूल निवासी बने। नोखा का परिणाम पार्टी को अपने संगठन के विस्तार के लिए एक और स्थानीय मंच देता है।
राजस्थान के व्यापक निकाय चुनाव क्या दिखाते हैं?
ये दोनों सफलताएं राजस्थान में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के एक बड़े दौर के दौरान सामने आयीं। केवल दूसरे चरण में ही 147 शहरी स्थानीय निकायों, जिनमें छह नगर निगम, 20 नगर परिषद और 121 नगर पालिकाएं शामिल थीं, में चुनाव हुए। राज्य निर्वाचन आयोग ने उस चरण में 70.68 प्रतिशत मतदान की सूचना दी। चुनावों में 77 ऐसे उम्मीदवार भी शामिल थे जो पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। इनमें से BJP ने 44 सीटें, कांग्रेस ने 16 और निर्दलीयों ने 17 सीटें जीतीं। इसलिए व्यापक परिणामों को बाराँ और नोखा के मुकाबलों से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए। BJP पूरे राज्य में एक प्रमुख ताकत बनी रही, जबकि कांग्रेस ने भी अन्य जगहों पर जीत दर्ज की।