केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की खबर ने गरमायी बिहार की राजनीति ल

ललन सिंह होंगे बाहर या संजय झा का होगा नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल में प्रवेश!

Central Cabinet

Courtesy: A. I.

नयी दिल्ली। नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल की खबर ने बिहार की राजनीति में सनसनी पैदा कर दी है। लोग कयास लगाने लगे हैं कि फेरबदल हुआ तो जदयू कोटे की दो सीटों पर किसका कब्जा होगा! यह भी कि नीतीश कुमार अगड़ी जाति से किसे मंत्री बनाये जाने की सहमति देंगे। उनके सामने असमंजस की स्थिति आ जायेगी। अगड़ी जाति से उनके सबसे करीबी में दो लोग हैं— राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और संजय झा। ललन सिंह नीतीश कुमार के पुराने साथी और सहयोगी रहे हैं। राजनीतिक सफर में ललन सिंह उनके पैर बनकर रहे हैं। यानी ललन सिंह नहीं होते तो नीतीश कुमार राजनीति की पगडंडी पर इतना सरपट नहीं दौड़ पाते। वह नीतीश कुमार का दाहिना हाथ भी माने जाते हैं। वहीं, संजय ​झा जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। कुछ वर्षों से वह नीतीश कुमार के अतिकरीबी बने हुए हैं। उसी निकटता की वजह से वह जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार राजनीति को तराजू के काँटे की तरह बराबर रखने में विश्वास रखते हैं। वह नहीं चाहेंगे कि मंत्री की दोनों कुर्सी अगड़ी जाति के हवाले कर दिया जाये। एक सीट वह अतिपिछड़ी जाति से आनेवाले रामनाथ ठाकुर को जरूर देंगे। रामनाथ ठाकुर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं। कर्पूरी ठाकुर की अति—पिछड़ी जातियों में अच्छा—खासा प्रभाव है। वे उनके आदर्श के तौर पर आज भी हैं। लालू प्रसाद के उभार से पहले कर्पूरी ठाकुर ही ​आर्थिक रूप से पिछड़ों की लड़ाई लड़ा करते थे। इसलिए उनकी पहचान से जदयू को मिलनेवाली मजबूती को नीतीश कुमार खोना नहीं चाहेंगे। ऐसी स्थिति में नीतीश कुमार के पास मात्र एक ही सीट बचेगी जिसपर अगड़ी जाति कोटे से मंत्री पद पर बैठायेंगे। 

संजय झा ब्राह्मण समाज से आते हैं। अगड़ी जाति में इनकी आबादी भूमिहारों की आबादी के आस—पास ही है। भूमिहारों की आबादी 37.50 लाख है। मध्य बिहार के बेगूसराय, पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली, भागलपुर और मगध प्रमंडल क्षेत्र में अधिक है। जबकि ब्राह्मणों की आबादी 47 लाख 81 हजार है। ये मुख्य रूप से मिथिला क्षेत्र के मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, के अलावा सारण प्रमंडल, भोजपुर, और पटना एवं गया के ग्रामीण इलाकों में अच्छी खासी संख्या में निवास करते हैं। 

संख्या के आधार पर नीतीश कुमार मंत्री बनायेंगे तो मंत्री बनने के रेस में अभी सबसे आगे संजय झा हैं। अगर नीतीश कुमार ने संजय झा को केन्द्र सरकार में मंत्री बनाने की स्वीकृति दे दी तो केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह पर गाज गिरेगी। कहा जा रहा है कि अगर नीतीश कुमार ने संजय झा को केन्द्रीय मंत्री बनाने की स्वीकृति दे दी तो केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह पर गाज गिरेगी। हालाँकि केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह भी इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीब तो हैं ही, साथ ही अपने सम्बोधन में लगातार प्रधानमंत्री की तारीफ करते नजर आये। पिछले दिनों ही मन की बात पर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया देते केन्द्रीय मंत्री नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे डैमेज कंट्रोल माना जा रहा है। वैसे कौन रहेगा या जायेगा, यह अंतिम फैसला जदयू से मिले इशारे के बाद मोदी और शाह को ही करना है। पर तब तक जदयू के भीतर हलचल तो चलती रहेगी।