Courtesy: A. I.
नयी दिल्ली। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर खुद पोस्ट साझा कर आकाश आनंद को बाहर करने के कारणों को स्पष्ट किया है। मायावती ने सोशल मीडिया पर जो पोस्ट किया है उसमें आरोप लगाया है कि आकाश आनंद पार्टी की विचारधारा और बहुजन आंदोलन से ज्यादा अपने पारिवारिक रिश्तों और ससुर अशोक सिद्धार्थ को महत्व दे रहे हैं। जब कोई नेता 'डबल माइंड' होकर काम करेगा, तो वह पार्टी और मिशन का भला नहीं कर सकता।
दरअसल, यह पूरा विवाद आकाश आनंद के ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ से जुड़ा हुआ है। मायावती ने शर्त रखी थी कि यदि अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूर्ण संन्यास ले लें तो आकाश को मौका मिल सकता है। अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति छोड़ने का ऐलान भी किया, लेकिन इसके बावजूद आकाश आनंद ने मायावती के उस आधिकारिक पोस्ट को अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'X' पर रीपोस्ट नहीं किया। मायावती इस बात से इतनी नाराज हुईं कि उन्होंने इसे अनुशासनहीनता और वफादारी की कमी मान लिया।
मायावती का मानना है कि आकाश आनंद अभी भी विरोधियों की "साम, दाम, दंड, भेद" वाली चालों को समझने के लिए राजनीतिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं हुए हैं। इससे पहले 3 सितम्बर 2026 को भी उनसे राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी इसी आधार पर छीनी गई थी.
बसपा के नजरिये से यदि मायावती के इस फैसले के सकारात्मक पहलुओं को देखा जाये, तो इससे पार्टी को कई तरह से फायदा पहुँचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस फैसले के जरिये मायावती ने उन आरोपों पर कड़ा प्रहार किया है जिसमें उन्हें वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है। विपक्षी दल हमेशा बसपा पर परिवारवाद और मायावती के बाद उनके भतीजे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं। आकाश को बाहर का रास्ता दिखाकर मायावती ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके लिए मिशन और संगठन सबसे ऊपर है, परिवार नहीं। जमीनी कार्यकर्ताओं में यह संदेश जायेगा कि बसपा में अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी, चाहे वह खुद सुप्रीमो का भतीजा या उत्तराधिकारी ही क्यों न हो।
मायावती ने साफ किया कि वो पार्टी की विचारधारा और बहुजन आंदोलन से ज्यादा अपने पारिवारिक रिश्तों और ससुर अशोक सिद्धार्थ को महत्व दे रहे हैं। पार्टी की विचारधारा और बहुजन आंदोलन से ज्यादा अपने पारिवारिक रिश्तों और ससुर अशोक सिद्धार्थ को महत्व दे रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि वो काँशीराम के सिद्धांतों पर चलती हैं, जिन्होंने आंदोलन के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और कभी परिवार को आगे नहीं बढ़ाया। इससे बसपा के पुराने कार्यकर्ता भावनात्मक रूप से पार्टी से दोबारा जुड़ सकते हैं। आकाश आनंद के निष्कासन के बाद उनके छोटे भाई ईशान आनंद की पार्टी में सक्रियता बढ़ गई है. ईशान ने मायावती के फैसले का स्वागत करते हुए पोस्ट भी साझा किया है, जिससे युवाओं के बीच एक नया और अधिक वफादार चेहरा पेश करने का मौका बसपा को मिल गया है.
इस फैसले के जितने फायदे गिनाये जा रहे हैं, बसपा के लिए इसके राजनीतिक नुकसान उससे कहीं अधिक गंभीर साबित हो सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में जो चर्चा है उसके मुताबिक, मायावती के इस फैसले से युवा मतदाताओं, खासकर आकाश आनंद के समर्थकों में निराशा है। आकाश आनंद लगातार युवाओं को बसपा से जोड़ने के लिए रैलियां कर रहे थे और रोजगार, शिक्षा जैसे मुद्दों पर मुखर थे। उन्हें हटाये जाने से सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर सक्रिय युवा कार्यकर्ता हतोत्साहित हो सकते हैं। इसका असर 2027 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। उत्तरप्रदेश चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है। ऐसे समय में शीर्ष नेतृत्व में बार-बार बदलाव जनता और कार्यकर्ताओं के बीच अस्थिरता और असमंजस का संदेश देता है। पिछले तीन सालों में आकाश आनंद को दिसम्बर 2023 में उत्तराधिकारी बनाना, मई 2024 में हटाना, जून 2024 में वापस लाना, मार्च 2025 में हटाना और फिर सितम्बर 2026 में पूरी तरह बाहर करना यह दर्शाता है कि पार्टी के फैसले बहुत जल्दबाजी और अपरिपक्वता में लिये जा रहे हैं। इससे बसपा की राजनीतिक विश्वसनीयता कमजोर होती है।
आकाश आनंद के पिता एवं बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार और छोटे भाई ईशान आनंद की मौजूदगी में आकाश का इस तरह जाना आंतरिक कलह को उजागर करता है, जिसका फायदा समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी जैसी विरोधी पार्टियाँ उठा सकती हैं।
मायावती का आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित करने का फैसला पूरी तरह से 'मिशन बनाम परिवार' की लड़ाई दिखाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, उत्तरप्रदेश की राजनीति में हाशिये पर चल रही बसपा के लिए चुनाव से ठीक पहले अपने सबसे सक्रिय युवा चेहरे को खोना एक बहुत बड़ा जुआ साबित हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईशान आनंद के सहारे मायावती युवाओं को साध पाती हैं या फिर आकाश आनंद का यह निष्कासन दलित राजनीति में बसपा के ग्राफ को और नीचे ले जायेगा!