दिल्ली सरकार के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता का फंदे से लटकता मिला शव

नोएडा सेक्टर-82 स्थित केन्द्रीय विहार-2 में किराये के मकान में रह रहे थे राकेश मेहता

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Courtesy: A. I.

नयी दिल्ली। दिल्ली सरकार के पूर्व मुख्य सचिव और सीनियर आइएएस ऑफिसर राकेश मेहता ने आत्महत्या कर ली। उनका शव नोएडा के सेक्टर-82 स्थित केन्द्रीय विहार-2 सोसाइटी में पंखे से लटका पाया गया। 78 वर्षीय राकेश मेहता वहाँ किराये के मकान में रहते थे। पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इस नोट में उन्होंने लिखा है कि काफी टाइम से चल रही बीमारी और उसकी वजह से हो रहे मानसिक तनाव के चलते उन्होंने ये कदम उठाया। साथ ही उन्होंने लिखा कि उनकी मौत के लिए कोई और ज़िम्मेदार नहीं है। पोस्टमार्टम के बाद राकेश मेहता का पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। फिलहाल पुलिस सुसाइड नोट और बाकी सबूतों के आधार पर पूरे मामले की जांच में जुटी है। राकेश मेहता के निधन की खबर से उनके पुराने साथी और कई लोग काफी दुखी हैं। लोगों ने उन्हें एक काबिल, ईमानदार और दूरदर्शी प्रशासक के तौर पर याद किया। हालांकि, पूरी सच्चाई क्या है, ये तो पुलिस जांच से ही साफ हो पायेगा।

राकेश मेहता पिछले करीब पांच सालों से नोएडा की इसी केन्द्रीय विहार- 2 सोसाइटी में अकेले रह रहे थे। रविवार, 6 सितम्बर को दोपहर लगभग 1:30 बजे पुलिस को खबर मिली कि वो अपने फ्लैट में मृत पाये गए हैं। सूचना मिलते ही नोएडा फेज-2 थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर उसे जाँच के लिए भेजा। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट की भी जाँच की जा रही है।

परिजनों के मुताबिक, वो काफी समय से हाई ब्लड प्रेसर, डायबिटीज़ और उम्र से जुड़ी दिक्कतों से जूझ रहे थे। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में भी लम्बे समय से चल रही बीमारी और उससे बने मानसिक दबाव का ज़िक्र है। बाकी जो भी पहलू हैं, उनकी जाँच पुलिस कर रही है। 

राकेश मेहता 1975 बैच के आइएएस ऑफिसर थे और उन्होंने दिल्ली सरकार में कई अहम पदों पर काम किया।उनका प्रशासनिक सफर करीब चार दशक से भी ज़्यादा लम्बा रहा, और इस दौरान उन्होंने दिल्ली के प्रशासन में कई बड़ी ज़िम्मेदारियाँ निभायीं। वो 2007 से लेकर नवम्बर 2010 तक दिल्ली के मुख्य सचिव रहे — यही वो दौर था जब दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 की तैयारियां ज़ोरों पर चल रही थीं, और शहर के इंफास्ट्रक्चर से जुड़े कई कामों में उनका बड़ा रोल रहा। राकेश मेहता जी का नाम बिजली के निजीकरण, प्रोपर्टी टैक्स असेस्मेंट में बदलाव, पुरानी ब्लूलाइन बसों की जगह लो—फ्लोर बसें लाने का काम और ट्रांसपोर्ट सिस्टम में सुधार सहित दिल्ली प्रशासन के कई बड़े बदलावों से भी जुड़ा है। इससे पहले वो एमसीडी कमिश्नर समेत दिल्ली सरकार के कई और बड़े पदों पर भी रह चुके थे।