छात्र प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों पर कथित पुलिस बर्बरता पर PUCL की जनसुनवाई

जाँच में पाया कि साक्ष्य राज्य-प्रायोजित दमन की ओर इशारा करते हैं

Jansunvai

Courtesy: A. I.

पटना (बिहार)। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) बिहार द्वारा राज्य में छात्र प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों पर हुई कथित पुलिस बर्बरता तथा मानवाधिकारों के हनन के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई (Public Hearing) का आयोजन किया गया जिसमें गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ इकट्ठा की गयी। 

बिहार में NEET परीक्षा विरोध प्रदर्शन सहित विभिन्न छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग, कथित अवैध हिरासत और मानवाधिकारों के उल्लंघन की कई घटनाएं सामने आई थीं। इसी कड़ी में पटना में आयोजित हुई मुख्य जनसुनवाई के बाद, जहानाबाद और अरवल सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी एवं अन्य दमनात्मक कार्रवाइयों की जांच के लिए इस जनसुनवाई का खाका तैयार किया गया। इसके तहत जनसुनवाई के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय पैनल का गठन किया गया जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता बसंत चौधरी, पद्मश्री सुधा वर्गीज, सामाजिक कार्यकर्ता अरशद अजमल और पूर्व पत्रकार प्रणव चौधरी को रखा गया। पैनल ने जाँच में पाया कि साक्ष्य राज्य-प्रायोजित दमन (State Repression) की ओर इशारा करते हैं। PUCL की फैक्ट-फाइंडिंग टीम और जनसुनवाई में मानवाधिकारों के उल्लंघन की कम से कम 16 अलग-अलग श्रेणियां दर्ज की गईं, जिनमें जहानाबाद और अरवल क्षेत्र के गंभीर मामले शामिल हैं। इन मामलों में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई अंधाधुंध गोलीबारी (Use of Firearms), हिरासत में दी गई यातनाएं (Custodial Torture) और मनमाने ढंग से की गई गिरफ्तारियां प्रमुख थीं। PUCL इन सभी गवाहियों, बयानों और रिपोर्टों को संकलित कर एक व्यापक दस्तावेज तैयार कर रहा है। इस विस्तृत रिपोर्ट को मानवाधिकार आयोगों (Human Rights Commissions), अदालतों, विधायी समितियों और सरकारी कार्यालयों को सौंपा जायेगा ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके।

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की बिहार इकाई मांग की है कि जहानाबाद, सीवान और अन्य प्रभावित इलाकों में पुलिसिया कार्रवाई की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करायी जाये, छात्र प्रदर्शनों के दौरान दर्ज की गईं प्राथमिकियों (FIRs) को तुरंत वापस लेने और जेल में बंद निर्दोष लोगों को रिहा किया जाये।