सिर्फ राजधानी के विकास को पूरे राज्य का विकास मानना सही नहीं: डीके ​शिवकुमार

बियॉन्ड बेंगलुरु पर कर्नाटक सरकार के काम ने पकड़ी गति, पाँच शहरों को किया जा रहा विकसित

Karnataka

Courtesy: A. I.

नयी दिल्ली। "किसी राज्य के विकास की कहानी सिर्फ उसकी राजधानी की कहानी नहीं हो सकती"। ये बातें कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। वो बेंगलुरु पर बढते आर्थिक और जन सांख्यिकी बोझ को कम करने के लिए राज्य में नये शहरों को विकसित करने की अपनी योजना पर पूरी तरह अडिग रहने की यही वजह बताते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक केन्द्रों का विकेन्द्रीकरण जरूरी है। उसी विकेन्द्रीकरण के तहत कर्नाटक सरकार 'बियॉन्ड बेंगलुरु' (Beyond Bengaluru) पर काम कर रही है। इसके तहत राज्य के प्रमुख टियर-2 और टियर-3 शहरों को नये हाई-टेक और आर्थिक इंजनों के रूप में विकसित किया जा रहा है। 

डीके शिवकुमार बेंगलुरु को कर्नाटक का 'मुकुट' मानते हैं। उसके विकास में कोई कमी देखना नहीं चाहते। परंतु, उनका लक्ष्य राज्य के अन्य हिस्सों में भी नये आर्थिक केन्द्र बनाना है ताकि युवाओं को रोजगार के लिए बेंगलुरु न भागना पड़े। इस बाबत उन्होंने अधिकारियों को औद्योगिक विकास के लिए 5 नये शहरों को चिह्नित करने का निर्देश दिया है। नये इंडस्ट्रियल और डिजिटल क्लस्टर पर भी उनका ध्यान है। इसके तहत सूचना प्रौद्योगिकी (IT), विनिर्माण (Manufacturing) और ज्ञान-आधारित उद्योगों को बेंगलुरु से बाहर स्थानांतरित करने की योजना है। बेंगलुरू से बाहर जिन शहरों में सूचना प्रौद्योगिकी (IT), विनिर्माण (Manufacturing) और ज्ञान-आधारित उद्योगों को स्थापित किया जाना है उनमें मैसूरु, मंगलुरु, हुब्बल्ली-धारवाड़-बेलगावी, तुमकुरू, कलबुर्गी, सैटेलाइट, और हाई-टेक सिटी बिदादी शामिल हैं।

लगभग 7 हजार 481 एकड़ से 9 हजार एकड़ में फैली इस परियोजना का बजट करीब 18 हजार 133 करोड़ रुपये है। इसमें 2 हजार एकड़ से अधिक जमीन सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप टेक और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के लिए रखी गयी है। यह एक 'वर्क-लाइव-प्ले' मॉडल पर आधारित शहर होगा, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा, ज़ीरो-कार्बन उत्सर्जन और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर होंगे। 

मजबूत शैक्षणिक और आइटी आधार के कारण मैसूरु को कर्नाटक के दूसरे सबसे बड़े आइटी शहर और नॉलेज इकोनॉमी हब के रूप में तेजी से अपग्रेड किया जा रहा है। हुब्बल्ली-धारवाड़-बेलगावी क्लस्टर को एआइ, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के उभरते हुए केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 400 से अधिक स्टार्टअप्स एक्टिव हैं। तटीय और बंदरगाह शहर होने के नाते मंगलुरु को फिनटेक, मरीन टेक और लॉजिस्टिक्स के प्रमुख औद्योगिक केन्द्र के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। जबकि तुमकूरू को बेंगलुरु के करीब एक बड़े औद्योगिक नोड के रूप में चिन्हित किया गया है। यहाँ करीब 7 हजार करोड़ के निवेश और 88 हजार से अधिक रोजगार पैदा करने की योजना पर काम चल रहा है। कल्याण-कर्नाटक क्षेत्र के मुख्य शहर कलबुर्गी को नये आर्थिक क्लस्टर के तहत सीमेंट, लॉजिस्टिक्स और कृषि-तकनीक उद्योगों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। 

डीके शिवकुमार का मानना है कि मैसूरु बेंगलुरु से बेहतर योजनाबद्ध शहर है। बेंगलुरु के ठीक बाहर ट्रैफिक और भीड़भाड़ रोकने के लिए बुनियादी ढांचे से लैस नये शहरों का प्रस्ताव है। उदाहरण के लिए, बिदादी के पास 9 हजार एकड़ में एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी (AI सिटी) बसाने की योजना पेश की गयी है, जो वैश्विक कम्पनियों और उन्नत अनुसंधान के लिए एक बड़ा हब बनेगी। नये शहरों को बसाने के साथ-साथ बेंगलुरु के मौजूदा बुनियादी ढाँचे को भी पूरी तरह अपग्रेड कर रहे हैं। इसके तहत शहर में 47 किलोमीटर लम्बी टनल रोड (सुरंग सड़क), डबल-डेकर फ्लाईओवर और बेंगलुरु बिजनेस कॉरिडोर जैसी मेगा परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इस दोहरी रणनीति से न केवल ट्रैफिक और जल संकट जैसी बेंगलुरु की बुनियादी समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि पूरे कर्नाटक का संतुलित क्षेत्रीय विकास भी सुनिश्चित हो सकेगा।