गरमा रहा JPNIC को निजी हाथों लीज पर देने का मामला

विपक्ष ने सरकार पर लगाया स्वतंत्रता सेनानियों के अपमान का आरोप

गरमा रहा JPNIC को निजी हाथों लीज पर देने का मामला

      लखनऊ। उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा लखनऊ के जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को निजी हाथों में सौंपने के फैसले पर राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस इस फैसले को लेकर सरकार पर हमलावर है और इसे स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान से जोड़कर देख रही है। विपक्ष का आरोप है कि JPNIC लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विरासत और समाजवादी आंदोलन का प्रतीक है। इसे निजी हाथों में बेचना या लीज पर देना स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों का अपमान है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि 'कमिशन' भ्रष्ट भाजपा सरकार का तेल-पानी है और 'निजीकरण' उसका जरिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस फैसले पर तीखा तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर पूछा कि "भाजपा सरकार है या दुकानदार?" उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार को ही ठेके पर बेचना बाकी रह गया है। 
        JPNIC को 30 साल की लीज पर निजी कम्पनियों को सौंपने के योगी सरकार के फैसले पर केवल समाजवादी पार्टी ही नहीं, कांग्रेस ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने सपा के सुर में सुर मिलाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का मूल चरित्र ही सार्वजनिक सम्पत्तियों का निजीकरण करना है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जनता के पैसे (करीब 821 करोड़ रुपये) से बनी इतनी भव्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर की इमारत को अपने पसंदीदा निजी ऑपरेटरों को कौड़ियों के भाव सौंप रही है। जयप्रकाश नारायण देश के एक महान स्वतंत्रता सेनानी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक थे। उनके नाम पर बने इस केन्द्र और म्यूजियम ब्लॉक का व्यावसायिक उपयोग या उसे निजी हाथों में देना उनकी ऐतिहासिक विरासत और देश के लोकतांत्रिक गौरव को ठेस पहुंचाने जैसा है।

       कांग्रेस ने 30 वर्ष के लिए दीर्घकालीन लीज की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे नीतिगत भ्रष्टाचार (Policy Corruption) करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस पूरी डील के पीछे बड़ी वित्तीय साँठगाँठ और 'कमीशन' का खेल है, जिसके तहत सरकारी सम्पत्ति का मालिकाना हक भले ही न बदला हो, लेकिन उसका पूरा आर्थिक लाभ निजी कम्पनियों की जेब में डालने का इंतजाम कर दिया गया है। विपक्षी दलों का यह भी आरोप है कि योगी सरकार ने पिछले 9 सालों से राजनीतिक द्वेष और बदले की भावना के तहत JPNIC के काम को जानबूझकर रोक कर रखा है। पहले भ्रष्टाचार की जांच के नाम पर इसे बंद रखा गया, जिससे यह इमारत जर्जर होने लगी, और अब उसी बर्बादी को बहाना बनाकर इसे पीपीपी (PPP) मॉडल या लीज के नाम पर निजी हाथों में सौंप दिया गया।

      विपक्ष के आरोप के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार सहित अन्य भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर करारा पलटवार किया है। सरकार का कहना है कि सपा शासनकाल के दौरान इस प्रोजेक्ट पर जनता के करीब 821 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये गए थे। लीज से मिलनेवाली रकम के जरिये अगले 30 वर्षों में यह राशि सरकारी खजाने (ट्रेजरी) में वापस आ जायेगी। भाजपा सरकार का तर्क है कि सपा सरकार में इस प्रोजेक्ट में भारी वित्तीय अनियमितताएं (घोटाले) हुई थीं, जिसके कारण इसकी लागत कई गुना बढ़ गई और यह सालों तक अधूरा पड़ा धूल फांकता रहा। परिसर में बने स्विमिंग पूल, लग्जरी होटल और हेलीपैड जैसी सम्पत्तियों को बर्बाद होने से बचाने के लिए पीपीपी/लीज मॉडल अपनाना जरूरी था। 

       इस बीच, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि JPNIC की जमीन या सम्पत्ति को बेचा नहीं जा रहा है, बल्कि केवल इसके संचालन और रखरखाव (Operation and Maintenance) के लिए लीज दी गई है। मालिकाना हक सरकार और प्राधिकरण के पास ही रहेगा।
 
क्या है जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC)?

      जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) लखनऊ के गोमतीनगर में करीब 18.6 एकड़ में फैला एक विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर है, जिसे अखिलेश यादव सरकार (2012-17) का 'ड्रीम प्रोजेक्ट' माना जाता है। इसमें 107 कमरों का लग्जरी होटल, 2000 सीटों की क्षमतावाला ऑडिटोरियम, ओलम्पिक साइज स्विमिंग पूल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और जयप्रकाश नारायण के जीवन पर आधारित एक आधुनिक म्यूजियम ब्लॉक शामिल है। 2017 में यूपी में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही इसका काम रुका हुआ था और यह राजनीतिक खींचतान का केन्द्र बना हुआ है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के प्रस्ताव पर उत्तरप्रदेश कैबिनेट ने JPNIC को 30 से 35 साल की दीर्घकालीन लीज पर निजी क्षेत्र को देने का फैसला लिया है। इस परिसर के संचालन का अधिकार 'वृंदावन बॉटलर्स' और 'रॉकवुड होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' के समूह को मिला है। इसके एवज में ये निजी कम्पनियाँ LDA को लगभग 8 अरब 31 करोड़ से 8 अरब 57 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगी। साथ ही, परिसर के बचे हुए दो अरब 50 करोड़ रुपये से अधूरे निर्माण कार्यों को भी कम्पनियाँ अपने खर्च पर पूरा करेंगी।