नयी दिल्ली। भक्ति और आस्था का महीना सावन का आज अंतिम सोमवार है। इस विशेष अवसर पर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह मंगला आरती के समय से ही मंदिरों के बाहर भक्तों की लम्बी कतारें देखने को मिल रही हैं। 'हर-हर महादेव', 'बम-बम भोले' और 'ॐ नमः शिवाय' के उद्घोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया है।

उधर, नेपाल में सावन (श्रावण) महीने के अंतिम सोमवार पर देश भर के शिवालयों और प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ और भक्तपुर के डोलेश्वर मंदिर सहित सभी शिवालयों में सुबह से भक्तों की लम्बी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुबह से ही मंदिर के सभी दरवाजे खोल दिये गए थे। भक्तों ने सुंदरीजल और बागमती नदी के तटों पर स्नान कर पवित्र जल उठाया और 'बोल बम' के जयकारों के साथ शिवलिंग पर जलार्पण किया। महिलाओं ने इस अवसर पर हरे, लाल और पीले रंग की चूड़ियां, पोते और वस्त्र धारण कर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के आखिरी सोमवार को शिव आराधना करने से पूरे महीने की पूजा का फल प्राप्त होता है। इसी विश्वास के साथ बच्चे, बूढ़े, महिलाएँ और युवा, सभी भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए आतुर दिख रहे हैं। इसको ध्यान में रखकर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उज्जैन के बाबा महाकालेश्वर मंदिर में भोर की प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुँचे। बाबा महाकाल की विशेष रूप से श्रृंगारित सवारी का दर्शन पाकर भक्त निहाल हो उठे। वहीं, वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में गंगा स्नान के बाद बाबा के जलाभिषेक के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ा हुआ है।
झारखंड के देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम और बिहार के अशोक धाम में भी लाखों काँवरियों ने सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर भोलेनाथ का अभिषेक किया। 
दक्षिण भारत के रामेश्वरम और मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंगों में भी विशेष परम्परा के अनुसार महापूजा का आयोजन किया गया है। गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के मंदिर में आज सुबह से ही भक्तों की अभूतपूर्व भीड़ देखी जा रही है। सावन के अंतिम सोमवार पर सोमनाथ दादा का महापूजा, विशेष महाआरती और मनमोहक श्रृंगार किया गया है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, महाराष्ट्र के नासिक में स्थित त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। गोदावरी नदी के तट पर स्थित इस पावन धाम में भक्तों ने ब्रह्मगिरि पर्वत की परिक्रमा की और भगवान त्र्यम्बकेश्वर का पवित्र जल से अभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। इन दोनों ही ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केन्द्रों पर उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किये गए हैं।
सावन के अंतिम सोमवार के साथ ही पवित्र कांवर यात्रा का भी समापन हो रहा है। उत्तराखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश और बिहार के सुल्तानगंज जैसे पवित्र घाटों से गंगाजल लेकर निकले काँवरियों का कारवां अपने गंतव्य के शिवालयों तक पहुंच चुका है। पैरों में छाले और भीषण थकावट के बावजूद इन शिव भक्तों का उत्साह देखते बनता है। स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा कांवरियों के लिए जगह—जगह चिकित्सा, भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई है। भगवा रंग में रंगे राजमार्ग और उन पर गूंजते शिव—भजन इस धार्मिक उत्सव की भव्यता को और बढ़ा रहे हैं। 
यह पावन पर्व केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर भी सावन के अंतिम सोमवार की धूम देखी जा रही है। नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में नेपाल और भारत के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है ही, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस जैसे देशों में बसे हिन्दु प्रवासियों ने स्थानीय हिन्दु मंदिरों में सामूहिक रुद्राभिषेक, भजन और कीर्तन का आयोजन किया है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से दुनिया भर के शिवालयों की लाइव आरती का प्रसारण किया जा रहा है, जिससे घर बैठे लोग भी वर्चुअल दर्शन का लाभ उठा रहे हैं।
भारी भीड़ को देखते हुए सभी राज्यों के स्थानीय प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किये हैं। मंदिरों के आसपास सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है, सादे कपड़ों में महिला एवं पुरुष पुलिस बल तैनात किये गए हैं। श्रद्धालुओं को धूप और उमस से बचाने के लिए वाटरप्रूफ टेंट, ओआरएस के घोल और पेयजल की भी व्यवस्था की गई है। कई प्रमुख शहरों में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाये रखने के लिए रूट डायवर्जन भी लागू किया गया है। भक्तों के सहयोग और प्रशासनिक सतर्कता के कारण अभी तक सभी स्थानों पर दर्शन और पूजा-अर्चना शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो रही है।