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नयी दिल्ली। हलद्वानी मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर अनुसूचित जाति—जनजाति एक्ट के तहत एफआइआर दर्ज होने के बाद 'हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद' एक बड़े राजनीतिक और कानूनी संग्राम में बदल चुका है। कांग्रेस ने प्रदेश के सभी जिलों में धरना प्रदर्शन की घोषणा की तो भारतीय जनता पार्टी ने भी हर जिला में धरना—प्रदर्शन की घोषणा कर दी।
राहुल गांधी पर मुकदमा दर्ज होने के बाद उत्तराखंड में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल आमने-सामने आ गए हैं। उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष सुजाता पॉल ने राहुल गांधी पर दर्ज हुई एफआइआर के विरोध में प्रदेश के सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन की घोषणा कर दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार असल दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय आवाज उठाने वाले विपक्ष के नेताओं को फंसा रही है। कांग्रेस खुद भी इस मामले में शुद्धिकरण करने वालों और भाजपा नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने पर अड़ी है।
कांग्रेस के प्रदर्शन के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी हर जिले में जवाबी धरना-प्रदर्शन की घोषणा की है। BJP का आरोप है कि कांग्रेस और राहुल गांधी हमेशा समाज को बांटने और हिन्दुओं को जाति के नाम पर लड़ाने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं। दोनों प्रमुख दलों द्वारा राज्यव्यापी प्रदर्शनों की घोषणा के बाद उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था बनाये रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अगस्त महीने की 30 तारीख को हल्द्वानी में वाल्मीकि समाज के अमित कुमार की शिकायत पर राहुल गांधी के खिलाफ BNS और SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अमित का आरोप है कि राहुल गांधी ने एक सामान्य धार्मिक अनुष्ठान को 'जातिवादी रंग' देकर दलित समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचायी है।
मामला अगस्त महीने की 8 तारीख को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजुर्न खड़गे की रैली से जुड़ा है। रैली के दो दिन बाद कुछ हिन्दूवादी संगठनों (श्री राम सेना) ने वहां 'शुद्धिकरण यज्ञ' और गंगाजल का छिड़काव किया था। राहुल गांधी और कांग्रेस का आरोप है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के दलित होने के कारण वहां शुद्धिकरण किया गया, जो कि सीधे तौर पर 'छुआछूत' और संविधान का अपमान है। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दोषियों के खिलाफ SC—ST एक्ट में एफआइआर दर्ज करने की मांग की थी।भाजपा और आयोजकों का पक्ष: भाजपा और यज्ञ के आयोजकों का कहना है कि रैली के बाद मैदान में भारी गंदगी छोड़ी गई थी और धार्मिक स्थल पर अमर्यादित नारे लगाये गए थे, जिसके कारण शुचिता के लिए हवन किया गया था। उनका दावा है कि इस अनुष्ठान में खुद दलित समाज के लोग भी शामिल थे और इसका खड़गे जी की जाति से कोई लेना-देना नहीं है।
बहरहाल, कांग्रेस के बाद अब BJP द्वारा हर जिले में धरना—प्रदर्शन की घोषणा ने प्रशासनिक महकमों में खलबली पैदा कर दी है। देखना यह है कि प्रदर्शनकारियों से वह कैसे निपटती है!