Courtesy: A. I.
नयी दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12 सितम्बर से शुरू होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने के लिए आज सुबह विशेष विमान से नयी दिल्ली पहुँच चुके हैं। पालम स्थित वायुसेना स्टेशन पर विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इस मौके पर पुतिन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद रूस के बाहर किसी ब्रिक्स सम्मेलन में पुतिन की यह पहली व्यक्तिगत मौजूदगी है।
आज ही यानी शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बीच होनेवाली एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय 'महाबैठक' पर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इस रणनीतिक मुलाकात का सबसे बड़ा आकर्षण दोनों देशों के बीच होने वाले रक्षा समझौते हैं, जिसमें रूस का पाँचवीं पीढ़ी का सबसे आधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान सुखोई-57 और अपडेटेड ब्रह्मोस मिसाइल डील सबसे ऊपर हैं। खबर है कि रूस भारत को न सिर्फ सुखोई-57 विमान बेचने को इच्छुक है, बल्कि उसने 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में इसके उत्पादन और टेक्नोलॉजी के पूरी तरह ट्रांसफर की पेशकश भी की है। भारत इस तकनीक का इस्तेमाल अपने स्वदेशी फाइटर जेट प्रोग्राम में करना चाहता है।
बैठक में भारत और रूस की संयुक्त सहभागिता वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को और अधिक घातक और अपग्रेड करने पर अंतिम मुहर लग सकती है। दोनों देश मिलकर इसे वैश्विक बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, बैठक में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बची हुई डिलीवरी, परमाणु ऊर्जा, द्विपक्षीय व्यापार में डॉलर की जगह स्थानीय मुद्राओं के उपयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर भी गहन चर्चा होने की संभावना है।